चतुर्थी व्रत निर्णय - कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का व्रत संकष्ट चतुर्थी व्रत कहलाता है।
By Goapl Gupta ·
03 Jun 2026 ·
11 views
चतुर्थी व्रत निर्णय -
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का व्रत संकष्ट चतुर्थी व्रत कहलाता है।
*द्वितीय ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष (अधिक मास) की चतुर्थी का व्रत 03 जून बुधवार को ही श्रेयस्कर है।*
चतुर्थी व्रत का सामान्य नियम-
*संकष्ट चतुर्थी तु चन्द्रोदय व्यापिनी ग्राह्या।*
अर्थात् संकष्ट चतुर्थी व्रत में चन्द्रोदय व्यापिनी तिथि ही ग्रहण करनी चाहिए। अर्थात् जिस दिन भी रात्रि में चतुर्थी आ जाए और उसमें चन्द्रोदय हो रहा हो रही तिथि ग्रहण करनी चाहिए।
परन्तु इस बार 03 जून को तृतीया में चतुर्थी है और 04 जून को पूर्ण चतुर्थी है।
अर्थात् दोनों दिन चतुर्थी तिथि में ही चन्द्रोदय होने जा रहा है।
ऐसी स्थिति में धर्मप्राण जन क्या करें?
ऐसी परिस्थिति में निर्णय दिया गया है कि-
*उभयदिने चन्द्रोदय व्यापित्वे तृतीया युतैव ग्राह्या।*
यदि दोनों दिन चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि होय तो तृतीया युत ही ग्रहण करें।
क्योंकि -
*संकष्ट चतुर्थी व्रते तु तृतीया योग प्राशस्त्यात्।*
चतुर्थी व्रत में चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी यदि तृतीया युता उपलब्ध हो रही हो तो प्रशस्त है।
अतः शास्त्रीय दृष्टि से 03 जून बुधवार को ही चतुर्थी का व्रत अधिक श्रेयस्कर है।
और यह चतुर्थी व्रत तो अधिक मास में आ रहा है वो भी लगभग तीन वर्ष बाद। अतः समुचित समय में ही व्रत करना चाहिए न कि शास्त्र विरुद्ध समय में।
कौन क्या कह रहे हैं या लिख रहे हैं यह पृथक् विषय है।
फिर भी अन्तिम निर्णय माननीय विद्वज्जनों का ही मान्य करना हितकर होगा।
🌹🙏🏻🌹
पंडित कौशल दत्त शर्मा
सेवानिवृत्त प्राचार्य- संस्कृत शिक्षा
नीमकाथाना राजस्थान
9414467988