कुर्बानी अल्लाह की कुर्बत का जरिया ईद-उल-अजहा पर गलियों और रास्तों को स्वच्छ रखें : सैयद मोहम्मद क़ादरी
By Goapl Gupta ·
28 May 2026 ·
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कुर्बानी अल्लाह की कुर्बत का जरिया
ईद-उल-अजहा पर गलियों और रास्तों को स्वच्छ रखें : सैयद मोहम्मद क़ादरी
जयपुर. ईदुल अज़हा की पूर्व संध्या पर यहां एक अहम विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें बकरीद यानि ईद-उल-अज़हा से संबंधित दीनी व दुनियावी बातों पर विस्तार से चर्चा हुई। वहीं उलेमा-ए-दीन ने मुस्लिम समाज से ईदुल अज़हा के मुबारक मौके पर कुर्बानी के साथ ही अन्य नसीहतें एवं व्यवहारिकता को अमल में लाने का आह्वान किया। मुख्य वक्ता सैयद मोहम्मद क़ादरी ने कहा-कुर्बानी महज एक रस्म नहीं, बल्कि बंदा-ए-मोमिन के जज्बा-ए-इतात, ईसार और कुर्ब-ए-इलाही की रौशन निशानी है। यह वह मुकद्दस अमल है जिसमें इंसान अपनी महबूब चीज को रजा-ए-खुदावंदी के लिए पेश करके अपनी बंदगी का ऐलान करता है। मगर इबादत की रूह सिर्फ नियत के इखलास में नहीं, बल्कि उसके असरात में भी छिपी होती है। अगर किसी नेकी के नतीजे में दूसरों के लिए तकलीफ, परेशानी या मुश्किल पैदा होने लगे, तो उसकी रूह मुतास्सिर होने लगती है। कुर्बानी चूंकि अल्लाह की कुर्बत का जरिया है, इसलिए उसमें ऐसा कोई पहलू शामिल नहीं होना चाहिए जो खल्क-ए-खुदा के लिए रंज और तकलीफ का सबब बने। सुन्नी दावते इस्लामी के निगरां सैयद मोहम्मद क़ादरी ने कहा-इस्लाम ने रास्तों के हुकूक को बहुत अहमियत दी है।सरवर-ए-कायनात ने रास्ते को इंसानी तहजीब और अखलाक का आईना करार दिया। इस्लाम के नजदीक रास्ते को साफ रखना और लोगों की आसानी का ख्याल रखना भी ईमान की निशानी है। भूले हुए को रास्ता बताना, अंधे को सहारा देना, रास्ते से पत्थर, कंटा या हड्डी हटाना और अपने बर्तन से दूसरे के बर्तन में पानी डाल देना भी सदका है। ये शिक्षाएं हमें बताती हैं कि इस्लाम का मिजाज राहत पहुंचाना, सफाई और भलाई है, न कि लापरवाही और तकलीफदेह रवैया।
सफाई करना भी इबादत का हिस्सा
मौलाना सैयद मोहम्मद कादरी ने कहा-यह बात जेहन में रहनी चाहिए कि कुर्बानी से पहले रास्तों को खुला रखना, गुजरगाहों को बहाल करना और कुर्बानी के बाद आलाइशों और गंदगी की फौरन सफाई करना भी इसी इबादत का हिस्सा है। इबादत वही मुकम्मल है जिससे रब राजी हो और बंदा-ए-खुदा भी राहत महसूस करे। कुर्बानी की खूबसूरती इस अहसास में है कि हमारे अमल से किसी राहगीर को परेशानी न हो और न किसी इंसान को तकलीफ पहुंचे।