सरकारी चरागाह पर कब्जे का खेल! स्टे के बावजूद धड़ल्ले से निर्माण, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
By Goapl Gupta ·
26 May 2026 ·
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सरकारी चरागाह पर कब्जे का खेल!
स्टे के बावजूद धड़ल्ले से निर्माण, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
जयपुर। राजधानी जयपुर के सवाई चक क्षेत्र स्थित मानबाग आनंद कॉलोनी में सरकारी चरागाह भूमि पर कथित कब्जे और निर्माण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। खसरा नंबर 13/1 की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी चरागाह दर्ज बताई जा रही है, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद मौके पर लगातार निर्माण कार्य जारी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जमीन पर स्टे होने की चर्चा के बीच भी निर्माण नहीं रुक रहा। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस सरकारी जमीन पर कब्जे की तैयारी लंबे समय से चल रही थी। पहले जमीन को समतल किया गया, फिर चारदीवारी खड़ी की गई और अब गेट लगाकर कब्जे की तस्वीर साफ नजर आने लगी है। इलाके में इसे लेकर भारी नाराज़गी है।
पहले टूटा निर्माण, अब फिर शुरू… किसके इशारे पर?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस निर्माण को पहले प्रशासन द्वारा हटाया गया था, वही काम अब दोबारा तेजी से शुरू हो गया है। ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर किसके संरक्षण में सरकारी चरागाह भूमि पर दोबारा निर्माण कराया जा रहा है? क्षेत्र में अजय घी वाला, आफताब टोपी और अब्दुल कय्यूम उर्फ डब्लू जैसे नाम चर्चाओं में हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पूरे इलाके में इसको लेकर चर्चाएं तेज हैं।
स्टे है तो मशीनें कैसे चल रही हैं?
लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर जमीन पर वास्तव में स्टे लागू है तो फिर मौके पर निर्माण सामग्री कौन पहुंचा रहा है? मशीनें कैसे चल रही हैं? और किसके इशारे पर गेट लगाकर कब्जे की तैयारी की जा रही है? स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बिना प्रशासनिक और स्थानीय तंत्र की मिलीभगत के सरकारी जमीन पर दोबारा निर्माण संभव नहीं है। लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद न तो निर्माण रुका और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई।
रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि
खसरा नंबर 13/1 का पूरा राजस्व रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए
स्टे आदेश की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए
निर्माण कराने वालों की पहचान सामने लाई जाए
संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो
जनता बोली अगर सरकारी जमीन सुरक्षित नहीं, तो भरोसा कैसे रहेगा?
लोगों का कहना है कि यह मामला अब सिर्फ जमीन विवाद तक सीमित नहीं रहा। यह सरकारी आदेशों की अनदेखी, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन गया है। स्थानीय लोगों में नाराज़गी है कि अगर स्टे के बावजूद सरकारी चरागाह भूमि पर कब्जे की कोशिशें जारी रहीं तो प्रशासन पर जनता का भरोसा कमजोर होगा।