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चंद्रपुरी, बड़ के बालाजी की पाठशाला में आचार्य वर्धमान सागर ने दिए संयम, संस्कार और आत्मशुद्धि का संदेश*

By Goapl Gupta · 26 May 2026 · 7 views
*चंद्रपुरी, बड़ के बालाजी की पाठशाला में आचार्य वर्धमान सागर ने दिए संयम, संस्कार और आत्मशुद्धि का संदेश*

जयपुर। चंद्रपुरी, बड़ के बालाजी स्थित पाठशाला मंगलवार को आचार्य वर्धमान सागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित धार्मिक प्रवचन एवं अध्ययन सत्र में धर्म को केवल सुनने या पढ़ने तक सीमित न रखकर उसे व्यवहार और जीवनचर्या में उतारने का संदेश दिया गया। आचार्य श्री ने कहा कि धर्म का वास्तविक प्रभाव व्यक्ति के आचरण, विचार और व्यवहार में दिखाई देना चाहिए।

आचार्य श्री ने प्रवचन के दौरान मन, वचन और शरीर पर संयम रखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि व्यक्ति को सदैव अच्छा सोचना, मधुर बोलना और अनावश्यक गतिविधियों से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि आत्मविकास और संयम की शुरुआत छोटे-छोटे प्रयासों से होती है तथा निरंतर अभ्यास से उपवास, त्याग और नियम सहज बन जाते हैं। स्वास्थ्य और साधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री ने नियमित योग एवं हल्के आसनों को आवश्यक बताया। साथ ही प्रतिदिन किसी छोटे त्याग का अभ्यास करने, जैसे रात्रि भोजन त्याग, संयमित भोजन और कुछ समय मौन रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि रात्रि भोजन कम करना धर्म और स्वास्थ्य दोनों दृष्टियों से लाभकारी है।

प्रवचन में बच्चों को छोटी उम्र से ही अच्छे संस्कार, अनुशासन और संयम सिखाने पर विशेष बल दिया गया। आचार्य श्री ने कहा कि परिवार और समाज का भविष्य संस्कारित पीढ़ी पर निर्भर करता है। उन्होंने समता बनाए रखने, छोटी-छोटी बातों पर क्रोध और विवाद से बचने तथा दूसरों की कमियों के बजाय स्वयं के दोषों को सुधारने का संदेश दिया। पूजा और मंदिर की मर्यादा पर बोलते हुए आचार्य श्री ने कहा कि पूजा शांत भाव, एकाग्रता और श्रद्धा के साथ करनी चाहिए। मंदिर को भक्ति, ध्यान और आत्मशांति का केंद्र बताते हुए उन्होंने अनावश्यक बातचीत और दिखावे से बचने की प्रेरणा दी। साथ ही कुछ समय मौन रहकर मोबाइल से दूरी बनाने और मन को स्थिर रखने का अभ्यास करने को कहा।

आचार्य श्री ने संतों एवं श्रेष्ठ व्यक्तियों के संग को जीवन परिवर्तन का माध्यम बताते हुए कहा कि अच्छा संग विचारों और व्यवहार दोनों को सकारात्मक दिशा देता है। उन्होंने कहा कि धर्म में पद या प्रतिष्ठा से अधिक महत्व गुण, विनय, ज्ञान और श्रेष्ठ आचरण का होता है। नियमित स्वाध्याय को आत्मविकास का महत्वपूर्ण साधन बताते हुए धर्मग्रंथों के अध्ययन और चिंतन की प्रेरणा भी दी। अंत में आचार्य श्री ने कहा कि यदि धर्म के प्रभाव से व्यक्ति का क्रोध कम हो, मन में शांति बढ़े और व्यवहार में मधुरता आए, तभी धर्म की साधना सार्थक मानी जाएगी। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विद्यार्थी एवं समाजजन उपस्थित रहे।

अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवा एकता संघ अध्यक्ष अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि आचार्य वर्धमान सागर महाराज का मंगल प्रवास चंद्रपुरी दिगंबर जैन मंदिर बड़ के बालाजी में चल रहा इस दौरान निरंतर आचार्य संघ और श्रावकों की पाठशाला आयोजित होती है जिस पर आचार्य श्री प्रतिदिन प्रत्येक विषय पर उसका महत्व बताकर उनकी पालना कैसे करनी चाहिए, क्यों हिंसा का त्याग करना चाहिए पर श्रावकों संग चर्चा कर रहे है। जिसमें बड़ी संख्या में समाजबंधु सम्मिलित होकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे है मंगलवार को श्रीपाल चूड़ीवाल, भागचंद चूड़ीवाल, सुरेश सबलावत, कमलचंद छाबड़ा, अनिल बोहरा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने संघ का आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त किया।

अभिषेक जैन बिट्टू
मो.- 9829566545

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