देश में बढ़ रही विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए प्रधानमंत्री से की मांग*
By Goapl Gupta ·
21 May 2026 ·
9 views
*देश में बढ़ रही विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए प्रधानमंत्री से की मांग*
जयपुर। मिशन हम भारत के ब्राह्मण समिति के संयोजक योगेश्वर शर्मा, कर्नल आर. एस. राजपुरोहित और संजय तिवारी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मांग करते हुए कहा है कि देश में लगातार फैल रहे असमंजस और भ्रम को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रेसवार्ता कर देश की जनता की विभिन्न समस्याओं का समाधान करें। समिति के संयोजकों ने भारत देश के प्रधानमंत्री से यह मांग करते हुए गुरुवार 21 मई को राजधानी जयपुर के चित्रकूट में गंगेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थित समिति के कार्यालय में प्रेसवार्ता आयोजित की। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि विगत कुछ वर्षों से संस्कृति और संस्कारों के प्रणेता ब्राहम्णों पर हर तरफ से आक्रमण करके उन्हें अपमानित और प्रताड़ित किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर चारों जगदगुरू शंकराचार्यों, पाँचों वैष्णवाचार्यों को उपेक्षित, प्रताड़ित और आहत किया जा रहा है।
लोकतंत्र की रक्षक न्यायपालिका पर प्रदेश स्तर के अखबार ने मुखपृष्ठ पर पहली खबर छापी कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के एक लाख पैंतीस हजार निर्णय लागू होने को भटक रहे है। अदालतों में लगभग साढे पांच करोड केस लम्बित है। वहीं कर्ज के चलते लगभग 7 हजार लोगों ने आत्महत्या की। विगत 5 वर्षों में 40 हजार महिलाएं गायब हुई। अकेले राजस्थान से 7200 बच्चे लापता हुए, जिनमें 84 प्रतिशत नाबालिग लड़कियां हैं। अमेरिका की किन्ही एप्सटीन फाईल्स के कुत्सित पन्नों में केन्द्र सरकार के मंत्री का नाम आया है। सिस्टम पर अविश्वास के कारण और एजेंसियों की मनमानी के कारण कई वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं। वर्ष 1990 में केन्द्र सरकार कर्मचारियों की संख्या एक करोड़ और देश की जनसंख्या 86 करोड़ थी। आज 140 करोड़ जनसंख्या पर केवल 50 लाख कर्मचारी है। अन्तर्राष्ट्रीय डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की कीमत बहुत ही दयनीय है। कश्मीर से धारा 370 और 35ए हटाने के बाद भी अपने ही देश में विस्थापित कश्मीरी पंडितों की घर वापसी नहीं हो पा रही। इलेक्ट्रानिक मीडिया को आज अधिकांश लोग गोदी मीडिया कहते हैं। अखबारों ने खोजी पत्रकारिता लगभग रोक दी है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत अमरीका का उपनिवेश दिखाई देने लगा है। सम्प्रभु भारत राष्ट्र के भीतर कथावाचक, साधु सन्यासी कल्पित "हिन्दू राष्ट्र" की मांग कर रहे हैं। पब्लिक सर्वेन्ट पब्लिक पापा की तरह व्यवहार करने लगे हैं। जनप्रतिनिधी राजप्रतिनिधी की तरह व्यवहार करते हैं। किसी के भी बिना मांगे "यूजीसी नियम" लाकर पूरे देश में जातीय जहर फैलाया गया है। इन सभी समस्याओं को लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की गई है कि प्रधानमंत्री देशभर के सभी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ एक खुली प्रेसवार्ता कर इन समस्याओं पर अपनी बात स्पष्ट रखें।