मलमास - अधिकमास विमर्श
By Goapl Gupta ·
17 May 2026 ·
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मलमास - अधिकमास विमर्श
बब एक चान्द्रमास अर्थात् शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से कृष्ण पक्ष की अमावास्या पर्यन्त तीस तिथियों में अर्थात् एक अमान्त मास में जब सूर्य की सङ्क्रान्ति अर्थात् सूर्य का राशि परिवर्तन नहीं होता है तो वह संक्रांति रहित अधिमास, अधिकमास, मलमास पुरुषोत्तममास या मलिम्लुचमास कहलाता है।
इसको ऐसे भी कह सकते हैं कि जब सूर्य के एक संक्रान्ति सौर मास में दो अमावस्या आन पड़े तो वह अधिक मास कहलाता है। और वह साठ तिथियों का होता है और सभी शुभ कार्यों में वर्जित है।-
आचार्य भृगु जी महाराज का वचन पठनीय है-
*एक राशि स्थिते सूर्ये यदा दर्शद्वयं भवेत्।*
*हव्य कव्य क्रिया हन्ता तदा ज्ञेयोऽधिमासक:।।*
यहां दर्श अमावस्या का अभिप्राय अमावस्या के अन्तिम क्षण से है न कि दीपावली निर्णय में कतिपय विद्वज्जनों द्वारा ग्रहण किये गये दर्श मान से।-
*अमावास्यान्त्यक्षण एव ज्योति:शास्त्रे प्रसिद्धत्वात्।*
ब्रह्म सिद्धांत में और भी कहा है -
*चान्द्रो मासो ह्यसंक्रान्तो मलमास: प्रकीर्त्तित:।।*
मलमास दो प्रकार का होता है जिस अमान्त चान्द्र मास में सूर्य संक्रांति न हो वह अधिक मास संज्ञक मलमास और जिस अमान्त चान्द्र मास में दो सूर्य संक्रांति हों वह क्षय मास कहलाता है।
दोनों में शुभकार्य वर्जित हैं।
अधिक मास हो चाहे क्षय मास दोनों में तेरह मास होते हैं। सम्भवत: इसी सन्दर्भ में श्रुति में तेरह महिनों के एक संवत्सर का वचन पठनीय है।-
*त्रयोदशमासा: संवत्सर:।* कहा गया है।
काठक गृह्य सूत्र में कहा है -
*यस्मिन् मासे न संक्रांति: संक्रांतिद्वयमेव च।*
*मलमास: स विज्ञेयो मास: स्यात्तु त्रयोदश:।।*
यहां स्फुटमान से सौर मास- सूर्य संक्रांति ग्रहण करना चाहिए न कि मध्यम मान से।
एक अधिक मास के बाद अगला अधिक मास 32 माह 16 दिन और 04 घटी बाद आता है।
वशिष्ठ सिद्धांत में कहा है कि -
*द्वात्रिंशद्भिर्गतैर्मासै: दिनै: षोडशभिस्तथा।*
*घटिकाणां चतुष्केण पतत्येकोऽधिमासक:।।*
और क्षय मास 141 वर्ष बाद आता है। कदाचित 122 वर्ष, 19 वर्ष में भी आता है।
जिस वर्ष कार्तिकादि तीन महिनों में से कोई क्षय मास आता है तो उस वर्ष चैत्रादिक दो अधिक मास आते ही हैं।
क्षय मास से पूर्व वाले अधिक मास को संसर्प अधिमास और बाद वाले को अंहस्पति अधिमास कहा जाता है।
कन्या राशि से कुंभ राशि की संक्रान्ति में अधिक मास नहीं आता है।-
*धटकन्यागते सूर्ये वृश्चिके वाथ धन्विनि।*
*मकरे वाथ कुम्भे वा नाधिमासो विधीयते।।*
इस बार ज्येष्ठ का महिना अधिक मास है जो सत्रह मई से 15 जून प्रातः तक चलेगा।
मलमास में काम्य श्रौत स्मार्त सभी क्रिया निष्फल कही गयी हैं। समयबद्ध गर्भाधानादिक संस्कारों का एवं नित्यकर्मों का दोष नहीं है।-
*श्राद्धजातकनामानि ये च संस्कार सवृता:।*
*मलिम्लुचेऽपि कर्त्तव्या: काम्या इष्टीश्च वर्जयेत्।।*
*अधिक मास में में गंगा दशमी अर्थात् गंगा दशहरा वृष की संक्रान्ति में 25 मई को ही श्रेयस्कर है। कतिपय विद्वज्जन लोकाचार से द्वितीय शुद्ध ज्येष्ठ में 24 जून को मिथुन की संक्रान्ति में कहते हैं, सब विद्वज्जन एक निर्णय कर लें तो सभी के लिए हितकर होगा।-*
*वृषस्थरवावेव दशहरा।*
अधिक मास में सूर्य संक्रांति और चैत्रादि मास के अनुसार दान-पुण्य का विशेष महत्व है।
इसमें गंगा दशहरा अणबूझ मुहूर्त की श्रेणी में रखा जा सकता है। पुरुषोत्तम मास की एकादशी कमला एकादशी कहलाती है जो व्रतोपवास की दृष्टि से देवप्रबोधनी एकादशी के तुल्य मानी गई है।
पंडित कौशल दत्त शर्मा
सेवानिवृत्त प्राचार्य- संस्कृत शिक्षा
नीमकाथाना राजस्थान
9414467988