सेवा संकल्प से पेंशनर संकलन * -
By Goapl Gupta ·
01 May 2026 ·
16 views
*सेवा संकल्प से पेंशनर संकलन * -- कैलाश चंद्र कौशिक जयपुर! *“पेंशन — उम्र की वफ़ादार हमसफ़र”*
जवानी में हम भी बड़े दिलफेंक थे,
तनख़्वाह नाम की एक हसीना के संग थे।
महीने की पहली तारीख को वो मुस्कुराती थी,
और तीसरी तक आते-आते “अलविदा” कह जाती थी!
कभी दोस्तों के साथ घूमने में चली जाती,
कभी EMI के संग भाग जाती,
हम ढूंढते रह जाते जेब के कोनों में,
और वो “खर्चों” के संग इठलाती!
फिर एक दिन ज़िंदगी ने करवट ली,
बालों ने भी सफ़ेदी की साज़िश की,
घुटनों ने भी कहना शुरू किया —
“भाई साहब, अब आराम कीजिए ज़रा जी!”
तभी एक नई नायिका ने एंट्री मारी,
ना मेकअप, ना नखरे — सीधी-सादी प्यारी।
नाम था उसका — “पेंशन”,
और अंदाज़ था पूरा “लाइफटाइम कनेक्शन”!
अब ये हर महीने टाइम पे आती है,
ना बहाना बनाती, ना रूठ के जाती है।
चुपचाप बैंक में आकर बैठ जाती है,
और SMS करके दिल बहलाती है!
“प्रिय ग्राहक, आपकी पेंशन आ गई है…”
बस ये मैसेज सुनकर दिल गा उठता है!
शाम की चाय के साथ जब बैठते हैं,
ये कान में धीरे से कहती है —
“घबराइए मत हीरो,
पिक्चर अभी बाकी है… मैं यहीं हूँ!”
हाँ, एक शर्त ज़रूर लगाती है ये,
साल में एक बार परीक्षा लेती है ये—
“जीवन प्रमाण पत्र” का फॉर्म भरवाती है,
और प्यार से पूछती है —
“बताइए… अभी ज़िंदा हैं?”
हम भी सीना तान के कहते हैं —
“अरे भई! टाइगर अभी ज़िंदा है!”
और सुनिए… असली मोहब्बत तो ये है,
अगर हम भी कभी चुपके से निकल जाएँ,
तो ये हमारी अर्धांगिनी का हाथ थाम लेती है,
उसे बिना झुके जीना सिखा देती है।
ना कोई शिकवा, ना कोई शिकायत,
बस चुपचाप निभाती है हर ज़िम्मेदारी की इबादत।
तो दोस्तों…
मोहब्बत बहुत देखी होगी आपने,
पर ऐसी वफ़ादारी कम ही मिलती है।
जहाँ तनख़्वाह ने साथ छोड़ा,
वहाँ पेंशन ने उम्र भर साथ निभाया है।
*इसलिए कहता हूँ :—*
*ना घबराइए उम्र के ढलने से,*
*ना परेशान होइए आने वाले कल से…*
*अगर पेंशन साथ है,*
*तो रिटायरमेंट भी “हनीमून फेज़” जैसा लगता ह�