पारिवारिक न्यायालय ने पत्नी की भरण-पोषण याचिका की खारिज; अपाहिज व दान पर जीने वाले पति को राहत
By Goapl Gupta ·
29 Apr 2026 ·
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पारिवारिक न्यायालय ने पत्नी की भरण-पोषण याचिका की खारिज; अपाहिज व दान पर जीने वाले पति को राहत
उदयपुर।.उदयपुर के पारिवारिक न्यायालय संख्या-1 के पीठासीन अधिकारी व न्यायाधीश पलविन्दर सिंह ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत दायर एक पत्नी की भरण-पोषण याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पत्नी के पास आय के अपने साधन हैं, जबकि उसका पति शारीरिक रूप से अक्षम है और दूसरों के रहमोकरम पर जी रहा है। प्रार्थीया श्रीमती गजरी बाई ने अपने पति मांगीलाल के खिलाफ प्रतिमाह 20,000 रुपये भरण-पोषण की मांग करते हुए यह याचिका दायर की थी। उसने आरोप लगाया था कि उसका पति शराब पीकर मारपीट करता है और उसे घर से निकाल दिया है। पत्नी ने दावा किया था कि मांगीलाल चिनाई, ठेकेदारी और खेती से हर महीने करीब 70-80 हजार रुपये कमाता है।
अदालत में विपक्षी (पति) मांगीलाल की ओर से न्यायमित्र श्री भरत प्रजापत और गणेश चौहान ने मजबूती से पैरवी की। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि असल में पुत्र की मृत्यु के बाद गजरी बाई ने ही मांगीलाल को घर से बाहर निकाल दिया था और मकान पर कब्जा कर लिया था। न्यायमित्रों ने अदालत में साबित किया कि पत्नी खुद उसी मकान में रहती है, वहां 8-10 साल से एक आटा चक्की चलाती है और मकान के 4-5 कमरे किराए पर देकर अपनी आजीविका आसानी से चला रही है।
सुनवाई व साक्ष्यों के अवलोकन के दौरान न्यायालय ने पति की दयनीय स्थिति पर गौर किया। साक्ष्यों में सामने आया कि मांगीलाल के दाहिने हाथ की तीन उंगलियां कटी हुई हैं, जिससे वह शारीरिक रूप से अक्षम है और चिनाई या मजदूरी का काम करने में असमर्थ है। इसके अलावा, अपने पुत्र की मृत्यु के बाद से वह मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया है और वर्तमान में खेरादीवाड़ा स्थित रामदेवरा मंदिर में शरण लिए हुए है। वह वहां थोड़ी बहुत साफ-सफाई करता है और पूरी तरह से मंदिर में आने वाले लोगों और आस-पड़ोस के निवासियों द्वारा दिए गए भोजन पर ही जिंदा है; कई बार उसे भूखा भी सोना पड़ता है।
सभी तथ्यों और सबूतों को देखते हुए, अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि प्रार्थीया पत्नी के पास अपना भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त साधन मौजूद हैं, जबकि विपक्षी पति के पास आय का कोई साधन नहीं है और वह अपने जीवित रहने के लिए दूसरों पर आश्रित है । इसके साथ ही, न्यायालय ने 16 अप्रैल 2026 को गजरी बाई की भरण-पोषण याचिका को अस्वीकार कर खारिज कर दिया ।