ShubhBhaskar
JANTANTRAKI AWAZ
E Paper

महाराणा प्रताप स्वतंत्रता के प्रथम अमर पुरोधा थे : डॉ.श्रीनिवास 486 वीं जयंती पर जनमत मंच द्वारा राणा प्रताप नगर स्थित प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं व्याख्यान आयोजित

By Goapl Gupta · 15 Jun 2026 · 41 views
महाराणा प्रताप स्वतंत्रता के प्रथम अमर पुरोधा थे : डॉ.श्रीनिवास
486 वीं जयंती पर जनमत मंच द्वारा राणा प्रताप नगर स्थित प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं व्याख्यान आयोजित
उदयपुर | दिनांक 15 जून 2026 | जनमत मंच के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा व स्वतंत्रता की भावना से ओत प्रोत प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में प्रथम अमर पुरोधा है जिन्होंने आजादी के लिए जंगलो में रहकर मेवाड़ भूमि को स्वतंत्र रखते हुए भावी पीढ़ी में आजादी के बीज बो दिए |
भारतीय इतिहास में महाराणा प्रताप का व्यक्तित्व अदम्य साहस, अटूट स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण है। वे केवल मेवाड़ के शासक नहीं थे, बल्कि स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले ऐसे युगपुरुष थे, जिनका जीवन आज भी प्रत्येक भारतीय को प्रेरणा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि उस काल में जब मुगल सम्राट अकबर ने भारत के अधिकांश भाग पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया था और अनेक राजाओं ने उसकी अधीनता स्वीकार कर ली थी, तब महाराणा प्रताप ने स्वाधीनता और स्वाभिमान को सर्वोच्च मानते हुए किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया। उन्होंने मेवाड़ की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
18 जून 1576 को लड़ा गया हल्दीघाटी का युद्ध भारतीय इतिहास के गौरवशाली अध्यायों में से एक है। सीमित संसाधनों और अल्प सेना के बावजूद महाराणा प्रताप ने अद्वितीय वीरता, रणकौशल और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। इस युद्ध में उनके अश्व चेतक ने भी स्वामिभक्ति और बलिदान की ऐसी मिसाल प्रस्तुत की, जो आज भी इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में अंकित है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद चेतक ने अपने स्वामी को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया और तत्पश्चात वीरगति को प्राप्त हुआ।
युद्ध के उपरांत भी महाराणा प्रताप ने संघर्ष का मार्ग नहीं छोड़ा। कठिन परिस्थितियों में जंगलों और पर्वतीय क्षेत्रों में रहकर उन्होंने निरंतर संघर्ष किया। उनका जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और राष्ट्रप्रेम के बल पर किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
जनमत मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर ने भारतीय युगावतार की धारणा पर प्रकाश डालते हुए कहां की जिस प्रकार सतयुग में श्री राम, द्वापर में महानायक श्री कृष्ण रहे उसी क्रम में महाराणा प्रताप ने सनातन धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए शक्तिशाली मुगल सम्राट अकबर से 25 वर्षों तक संघर्ष कर जीवन पर्यंत मेवाड़ भूमि की रक्षा कर पूरे विश्व पटल पर आजादी का प्रेरणास्पद संदेश दिया है |
माथुर ने कहा "महाराणा प्रताप के आदर्शो से ही राष्ट्र एकता संभव है" एवं स्वतंत्रता किसी भी राष्ट्र की सबसे अमूल्य धरोहर है उसकी रक्षा के लिए साहस, त्याग और समर्पण की आवश्यकता होती है। युवाओं को महाराणा प्रताप के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित, कर्तव्यनिष्ठा और स्वाभिमान के मार्ग पर अग्रसर होना चाहिए। प्रताप द्वारा अपनायी गयी सफल प्रतिरोध निति के कारण ही मुग़ल सेना मेवाड़ पर अधिकार करने में असफल रही |
जनमत मंच के सह सचिव डॉ. प्रियदर्शी ओझा ने कहा कि महाराणा प्रताप स्वतंत्रता के सच्चे प्रहरी, प्रजा के संरक्षक और जन-जन के प्रेरणास्रोत थे। उनका जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग और स्वाभिमान की अमर गाथा है, जो सदैव देशवासियों को प्रेरित करती रहेगी। ओझा ने प्रताप कालीन दुर्गो के सामरिक महत्व को बताते हुए ऐतिहासिक धरोहरों दिवेर, चावंड,हल्दी घाटी,आवरगढ़ (कमलनाथ) के संरक्षण पर जोर दिया |
रियांश ओझा, शौर्य मीणा,प्रणय मीणा ,भव्य मीणा ,मनमीत सिंह चौहान,मुकेश भोई एवं लाल सिंह झाला ने प्रताप का स्मरण कर कविता पाठ ,पुष्पांजलि अर्पित कर प्रताप के आदर्शों पर चलने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प लिया

More News

Share News

WhatsApp

X

Facebook

Telegram

Instagram

YouTube