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दादू साहित्य में समरसता और मानवता का संदेश, राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

By Goapl Gupta · 30 Mar 2026 · 18 views
दादू साहित्य में समरसता और मानवता का संदेश,

राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

दादूपंथी साहित्य शोध संस्थान जयपुर की भूमिका रही केंद्र में

‘दादू दयाल और हमारा समय’ पुस्तक का विमोचन, विद्वानों ने रखे विचार

जयपुर . राजस्थान विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में आयोजित ‘दादू साहित्य चिंतन के विविध आयाम’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। संगोष्ठी में दादू साहित्य के माध्यम से मानवता, समरसता और आध्यात्मिक चेतना के संदेश को विस्तार से प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम में दादूपंथी साहित्य शोध संस्थान, जयपुर की भूमिका विशेष रूप से केंद्र में रही। संस्थान के अध्यक्ष स्वामी रामसुखदास जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि दादू पंथ केवल एक धार्मिक धारा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों का जीवंत संदेश है। उन्होंने कहा कि दादू दयाल की वाणी आज भी समाज को जोड़ने, भेदभाव मिटाने और मानवता को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में जब समाज कई प्रकार के विभाजनों से गुजर रहा है, तब दादू साहित्य एक मार्गदर्शक के रूप में सामने आता है। यह साहित्य व्यक्ति को आत्मचिंतन, सादगी और सेवा भाव की ओर प्रेरित करता है।

संगोष्ठी के दौरान ‘दादू दयाल और हमारा समय’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसमें दादू दर्शन के समकालीन संदर्भों को उजागर किया गया है।

दो दिनों तक चली इस संगोष्ठी में विभिन्न सत्रों के माध्यम से दादू साहित्य के दार्शनिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पक्षों पर गहन चर्चा की गई। विद्वानों ने एक स्वर में कहा कि संत परंपरा भारतीय संस्कृति की आत्मा है और दादू दयाल का साहित्य उसमें विशेष स्थान रखता है।

समापन अवसर पर आयोजकों ने कहा कि इस तरह की संगोष्ठियां नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। कार्यक्रम का समापन आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।

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