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अंधी परंपरा नहीं, विवेकपूर्ण परंपरा*

By Goapl Gupta · 28 Dec 2025 · 30 views
*अंधी परंपरा नहीं, विवेकपूर्ण परंपरा* -- कैलाश चंद्र कौशिक
जयपुर! जयपुर जैन सभा समिति ने शिष्टाचार पूर्ण सच को आज के समय की आवश्यकता और पूर्ति जोर दिया है! प्रवक्ता डा.पी.सी.जैन ने प्रस्तुति देकर जगरुकता और सुधार पर बल देते हुए बताया कि सिर्फ पुरानी चली आ रही हैं, इसलिए किसी परंपरा को विवादित या असुविधाजनक रूप में ढोते रहना उचित नहीं है। जबकि यह भी विचारणीय है कि वे किस परिस्थिति में बनी थीं। समय, समाज और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, इसलिए परंपराओं का निर्वाह *समझ, विवेक और उद्देश्य* के साथ होना चाहिए, ताकि यदि कोई प्रश्न करे तो हम उसका संतोषजनक और तर्कसंगत उत्तर दे सकें।
*जैसे पहले दाह संस्कार लकड़ियों में ही किए जाते थे क्योंकि कोई विकल्प मौजूद नहीं थे, वह परंपरा बन गई* पर आज दाहसंस्कार के लिए लकड़ियों से जाने अनजाने में हो रही *हिंसा* से बचने के साथ ही *प्रकृति, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य को बचाने के लिए* दाह संस्कार विद्युत/गैस आधारित शवदाह गृह में करवाना सर्वश्रेष्ठ विकल्प है।

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