रामकथा में राम नाम के तैरते पत्थरों के दर्शन करवाए - पानी में पत्थर छोड़ते ही तैरने लग गए सभी भक्तो ने राम नाम के जयकारे लगाए
By Goapl Gupta ·
12 Apr 2026 ·
17 views
रामकथा में राम नाम के तैरते पत्थरों के दर्शन करवाए
- पानी में पत्थर छोड़ते ही तैरने लग गए सभी भक्तो ने राम नाम के जयकारे लगाए
उदयपुर जनतंत्र की आवाज विवेक अग्रवाल । सर्वेश्वर महादेव मंदिर,डोरे नगर,सेक्टर 3 में श्री राम दरबार प्राण प्रतिष्ठा एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर पाटोत्सव के उपलक्ष्य में संगीतमय रामकथा के पांचवे दिन श्री पुष्कर दास महाराज के द्वारा चल रही संगीतमय रामकथा में महाराज एवं सर्वेश्वर महादेव विकास समिति के गोपाल सैनी,शिवशंकर गौड़,लव शर्मा,दामोदर सैनी,एस एल गुप्ता,देवी सिंह,केसर सिंह,लक्ष्मण सिंह,मनोज यादव,सभी सदस्यों ओर भक्तों द्वारा राम सेतु में जिन तेरते पत्थरों को उपयोग में लिया था उसी में से दो पत्थर कथा प्रांगण में पानी में छोड़े गए और पत्थर तैरने लगे l सभी भक्तो ने राम नाम के जयकारे लगाए l पांचवे दिन महाराज ने कहा जब सेतु बंध बनाया जा रहा था तब सभी वानर सेना पत्थरों को समुद्र में डाल रहे थे l भगवान राम ने सोचा मेरे नाम से पत्थर तेर रहे हे तो एक पत्थर में भी पानी में डालू l प्रभु ने पत्थर पानी में छोड़ा और वो तो डूब गया l पीछे हनुमान जी खड़े थे भगवान राम ने हनुमान जी से पूछा मेरा नाम लिख कर पत्थर समुद्र में छोड़े जा रहे हे और वो तेर रहे ओर मेने पत्थर पानी में छोड़ा तो वो डूब क्यूं गया हनुमान जी ने प्रभु के प्रश्न का जवाब देते हुए कहा भगवन आपके नाम से सभी तर जाते हैं और आप इस जीवन रूपी सागर से जिसको छोड़ते हे वो तो इस भवसागर में डूबेगा ही डूबेगा।
आगे महाराज ने कहा रामायण में राम ओर भरत का प्रेम था उसी तरह घर घर के प्रेम का वातावरण होना चाहिए।
रामायण में सीता जी के पिता राजा जनक और माता सुनैना ने बेटी को सिख दी सबसे पहले सास,ससुर ओर गुरु की सेवा करना, राम को 14 वर्ष का वनवास होने के कारण सीता जी ने भी राम के साथ वनवास काटने की इच्छा रखी। राम जी के मना करने के बाद भी सीता जी नहीं मानी बोली जहां मेरे पति परमेश्वर में वही सुख,दुख में साथ रहूंगी । राजा जनक चाहते तो बेटी सीता ओर राम के लिए वनवास में सुख के इंतजाम कर सकते थे परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया। बेटी को यही सिख दी सुख हो या दुख हर इंसान को भोगना हे l कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज ने कहा वनवास में राम ओर सीता को कई दुखों का सामना करना पड़ा l ईश्वर होकर भी उन्हें सब सहन करना पड़ा तो हम जैसे जीवों को भी सहन करना पड़े तो कोई बड़ी बात नहीं है l मनुष्य चाहे तो हर समय प्रभु का सुमिरन कर सकता हे l महाराज ने कहा राम अयोध्या में आए तो सुख की बारिश ज्यादा हुई तो भगवान ने सोचा अब थोड़ी धूप की जरूरत हे ओर निमित्त कैकई, मंथरा बनी ओर प्रभु को 14 वर्ष का वनवास हुआ l केवट ने भी प्रभु राम के चरण धोए तो उसके भी मन की दुख,दोष,दरिद्रता,जलन मिट गई l अंत में संयोजक विट्ठल वैष्णव ने बताया रामकथा की पूर्णाहुति मंगलवार प्रातः 10 से 1 बजे मध्य महाआरती के साथ होगी।